Thursday, September 19, 2019

अमेरिका स्वातन्त्रय युद्ध की वास्तविक महत्ता

अमेरिका स्वातन्त्रय युद्ध की वास्तविक महत्ता


वह अपने पूर्वज जॉज का शासक नहीं रहना चाहता था। वह था। वह उपनिवेशों पर का खर्च वह अमेरिका से स्कूल साथ एक अयोग्य व्यक्ति साबित का साथ नहीं रख पाया। अमेरिकी मामला का मामलों के मन्त्री मन ने इंग्लैण्ड में बैठे-बैठे ही युद्ध संचालन करने का प्रयास किया और समय-समय पर नये आदेश देकर सेनापतियों को खिन्न कर दिया। वाशिंगटन के योग्य एवं कुशल नेतृत्व ने भी उपनिवेशवासियों की सफलता में योग दिया । वाशिंगटन उच्च लक्ष्य रखने वाला चरित्रवान नेता था जिसने अत्यन्त कठिन परिस्थितियों में अमेरिकी क्रांति का सफल नेतृत्व किया । उपनिवेशवासियों का उसमें दृढ़ विश्वास था। उसने अपने सैनिक नेतृत्व में राष्ट्र के आत्मविश्वास को बनाए रखा।

इंग्लैण्ड के सेनानायकों तथा सैनिकों का बड़ा योगदान


उपनिवेशवासियों की सफलता के कारणों में इंग्लैण्ड के सेनानायकों तथा सैनिकों का बड़ा योगदान रहा । उपनिवेशों में लड़ रही सेना में भर्ती किये गये यूरोप के भाड़े के सिपाहियों से कोई आशा नहीं की जा सकती थी। अंग्रेज सेनानायकों ने भी अनेक मूलें की। हो (हॉव) तथा बर्गोइन आरामतलब सेनानायक थे तथा उन्होंने अनेक बार हाथ में आये अवसरों को खोया एवं कभी भी पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया।

फ्रांस के युद्ध में खुले रूप से शामिल हो जाने से उपनिवेशों के पक्ष में पलड़ा भारी हो गया। बाद में स्पेन, हॉलैण्ड द्वारा उपनिवेशों की सहायता के निश्चय ने भी इंग्लैण्ड की स्थिति को कमजोर बनाया । इन राष्ट्रों की जल सेना ने इंग्लैण्ड की जल सेना को काफी परेशान किया और इंग्लैण्ड के लिए अमेरिका स्थित अपनी सेनाओं को सामान पहुँचाना कठिन बना दिया । फ्रांसीसियों के सहयोग से ही वाशिंगटन ने यार्क टाउन में लार्ड कार्नवालिस को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया ।

अंग्रेजी सेना छापामार युद्ध से निपटने में योग्य नहीं थी और अमेरिकी युद्ध मुख्यतः इस पद्धति से लड़ा गया । वास्तव में जॉर्ज वाशिंगटन को केवल कुछ सामरिक केन्द्रों की सुरक्षा करनी पड़ी जबकि कार्नवालिस तथा हो को एक पूरे महाद्वीप को जीतना था । लार्ड नॉर्थ व जॉर्ज तृतीय ने इस अन्तर को ठीक से नहीं समझा।


क्रांति का स्वरूप


अमेरिका की इस क्रांन्ति का स्वरूप मुख्यतः मध्यवर्गीय था। अमेरिका के मध्यवर्गीय लाग अत्यन्त उदार एवं प्रगतिशील थे। यह जाग्रत वर्ग था जिसमें राजनीतिक चेतना का अभाव नहीं था । यह वर्ग उपनिवेशी शासकों के विशेष अधिकारों और सुविधाओं से घृणा करता था। यह वर्ग सामाजिक समानता की माँग करता था और अपने राजनीतिक पकारा को मान्य बनाना चाहता था। इस वर्ग में निराशा व असंतोष की भावना थी सह संघर्ष करके मिटाना चाहता था। प्रारम्भ में यह वर्ग भी उपनिवेशों में सच्चे अथा जातन्त्रको स्थापना का लक्ष्य रखता था और मात-राज्य से विणेह नहीं चाहता था।

स वर्ग में जब यह चेतना उत्पन्न हई कि उपनिवेशी शासकों तथी स्वाथी वा का कामात इंग्लैण्ड में है तो इस वर्ग में सम्पूर्ण उपनिवेशी स्वायत्त सरकार की स्थापना व्य बनाया। इसके लिए अठारहवीं सदी के अन्तिम तीन दशकों में पढ़े-लिखे लोगों. व्यवसायियों तथा किसानों ने प्रयास किया। इस सबका यह तात्पर्य नहीं है ति में नगरों के साधारण मेकेनिकों साधारण ने संग्राम को उपेक्षा की राम वर्ग ने ही किया। इसका स्पष्ट लोगों ने हस्ताक्षर किये थे, उनमें केवल वकील थे ।

संविधान परिषद


कि सर्वसाधारण ने संग्राम में भाग नहीं लिया। क्रान्ति में नगरों ने तथा मिस्त्रियों ने खुलकर भाग लिया । निःसन्देह सर्वसाधारण ने संया दष्टि से नहीं देखा किन्तु संग्राम का पथ-प्रदशन मध्यम वर्ग ने ही किया। इस प्रमाण यह है कि स्वतन्त्रता के घोषणा पत्र पर जितने लोगों ने हस्ताक्षर किये अधिकांश लोग मध्यम वर्ग के ही थे। उनमें आधे तो केवल वकील थे। संवि में भी मध्यम वर्ग के व्यक्तियों का बोलबाला था । अतः जो संविधान बना, उसन पूर्ण जनतन्त्र राज्य कायम नहीं हुआ । जन-साधारण को मताधिकार से वंचित रखा स्त्रियों, नीग्रो तथा बहुत से रवतो को भी मताधिकार नहीं मिला। इतिहासकार र क्रिस्टोल ने यह मत व्यक्त किया है कि अमेरिकी क्रांति फ्रांसीसी क्रान्ति की भाँति आधनिक नहीं थी क्योंकि इस क्रांति ने जन-साधारण को भविष्य के प्रति आश्वासन तो नहीं दिया परन्तु जन-साधारण को सुखमय जीवन का लक्ष्य बोध प्राप्त करने की प्रेरणा अवश्य दी

एक बात और, अमेरिकी क्रान्ति में एक वर्ग-संघर्ष देखा जा सकता है जिसमें एक ओर, इंग्लैण्ड का कुलीन शासनवर्ग था जिसके समर्थन में स्वयं अमेरिका का धनी वर्ग था, जो प्रजातन्त्र के आगमन और उसकी प्रतिक्रियाओं से भयभीत तो था। दूसरी ओर अमेरिका के परिश्रमी, मध्यम व उच्च वर्ग के लोग थे ।


अमेरिकी क्रान्ति का महत्व


अमेरिका स्वातन्त्रय युद्ध की वास्तविक महत्ता न तो स्पेन या फ्रांस के प्रादाराक लाभी, न हॉलैण्ड की व्यापारिक क्षतियों तथा इंग्लैण्ड के साम्राज्य की अवनति न वरन् इसकी वास्तविक महत्ता अमेरिकी क्रान्ति के सफल सम्पादन में पाई जा अमेरिका की क्रान्ति विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाओं में एक है। इस जा सकता है। आधुनिक मानव की प्रगति में अमेरिका का का
आ में एक है। इस क्राति का महत्व
कई दृष्टियों से आंका जा सकता है । आधुनिक मानव काम एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है। इस क्रान्ति के फलस्वरूप नई दुनिया एक राष्ट्र का जन्म हुआ वरन् मानव जाति की दृष्टि से एक नये युग का अमेरिका की यह क्रान्ति कार्ल एल. बेकर के अनुसार, "एक नहा आप फलस्वरूप नई दुनियों में न केवल क नये युग का आरम्भ हुआ। एक नहीं अपितु दो क्रान्तियों का निवेशों में ब्रिटेन के विरुड का कारण उपनिवेशों व ब्रिटेन के मध्य आर्थिक सम्मिलन थी। प्रथम, 'बाह्य क्रान्ति था जिसका विद्रोह किया गया तथा जिसका कारण उपनिदेशाप संघर्ष था। द्वितीय, 'आन्तरिक क्रान्ति' थी, जिसका प्रया के भविष्य की रूपरेखा तैयार करना था।" क्रान्ति ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनीतिक ही. इसके अतिरिक्त वहाँ के सामाजिक, धार्मिक आरसा कर दी । क्रान्ति के द्वारा अमेरिकी जनता को एक पारव जिसमें परम्परा, धन और विशेषाधिकारों का महत्व महत्व अधिक ।

विशेषाधिकारों का तीन प्रमुख दिशाआ पश्यात् जनतन्त्र को काफी प्रोत्साहन मिला-अथर्थात् पर ता के पश्चात् अमेरिका अनारका के राजनीतिक जीवन को एक नया मान जक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन की भी का का एक परिवर्तित सामाजिक अवस्था । का महत्व कम था और मानवीय समानता क नया मोड़ तो दिया का भी कायापलट अवस्था प्राप्त हुई दशाओं में सफल अधिक्रमण करन मात् परम्परागत साम्पत्तिक अधिकार

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