Monday, September 2, 2019

क्रांति पूर्व अमेरिका की स्थिति

क्रांति पूर्व अमेरिका की स्थिति


उत्तर में मेन से दक्षिण में जार्जिया तक कुल तेरह अंग्रेजी पत्तियों थीं। इन उपनिवेशों 1713 से 1763 ई. के बीच जनसंख्या में चार गुना वृद्धि हुई। इसकी तुलना में क्षेत्रफल । पनि गुना बढ़ोतरी हुई जो कि बस्तीवासियों के पश्चिम की ओर अग्रसर होने से हुई।

1763 ई. के बीच बड़ी संख्या में अंग्रेज, स्कॉट, जर्मन तथा फ्रेंच आप्रवासी का बस्तियों में जाकर बसे । ये वाणिज्यवाद के महत्वपूर्ण वर्ष थे। अमेरिका के उत्पादनों यथा लकड़ी, चमड़ा, तम्बाकू, चीनी, तांबा, मछली आदि की कीमतें इंग्लैण्ड यद्यपि इंग्लैण्ड की व्यापारिक ती के कारण हैऔर इंग्लैण्ड की यात्रा पर जाना 196 तथा यूरोप में तेजी से बढ़ी जिससे अमेरिकी लोग समृद्ध हुए, यद्यपि डरले नीति लगातार बाधाएँ खड़ी करती रही 1 50 वर्षों की लगातार र अमेरिकी तत्कालीन विश्व में ऊँचा जीवनस्तर बना पाये । इंग्लैण्ट की अब एक आम बात बन गई थी । विदेशों से पुस्तकों का आयात बहत सपस्तकों का आयात बहुत बड़े स्तर पर किया जाने लगा था और कई पत्र-पत्रिकायें अमेरिका में भी छपने लगी थीं। अमेरीकियों का लगाव पैदा हो चुका था । कुछ पत्रों जैसे गजट, न्यूयॉर्क रिसा की यूरोप तक में माँग हो चुकी थी । बोस्टन व अनापोलीस जैसे नगरों में डंग्ज तुलना में अधिक सुन्दर भवनों का निर्माण किया गया। कई प्रसिद्ध अमेरिकी विश्वविद्या जैसे प्रिंस्टन, येल, डार्ट माउथ, बाउन इत्यादि क्रांति से पूर्व स्थापित हो चुके थे। क्रांति काल के कुछ महत्त्वपूर्ण अमेरिकी नगर थे-बोस्टन, न्यूयार्क, जेम्स टाउन, चार्ल्स टाउन सवानाह, फिलाडेलफिया आदि ।

अमेरिकी क्रांति के कारण


यह आशा कभी भी नहीं की जा सकती थी कि अमेरिकी उपनिवेशवासी सदैव के लिए इंग्लैण्ड के अधीन रहते । परन्तु 1776 में तथा इससे पूर्व ऐसी घटनायें घटित हुई जिन्होंने क्रांति को जन्म दिया । अमेरिका की क्रांति निःसन्देह उपनिवेशों और मातृ राज्य में मौलिक मतभेदों के कारण हुई । वास्तव में अमेरिका का स्वतन्त्रता संग्राम मुख्यतः प्र ब्रिटेन तथा उसके उपनिवेशों के बीच आर्थिक हितों का संघर्ष था, किन्तु कई तराका । यह उस सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था के विरुद्ध भी विद्रोह था जिसकी उपयोग अमेरिका में कमी की समाप्त हो गई थी। दूसरे शब्दों में, अमेरिकी क्रांति एका आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, एवं धार्मिक अनेक शक्तियों का परिणाम थी। स युद्धों के पूर्व तक अमेरिकी उपनिवेशों को इंग्लैण्ड की तथा इंग्लैण्ड को अपने उपनिवेशों की चिन्ता नहीं थी, परन्तु 1763 ई. के पश्चात् इंग्लैण्ड द्वारा कठोर व्यापारवादी व्यवस्था एवं औपनिवेशिक नीति ने विद्रोह को जन्म दिया। न तो गरीबी के कारण उत्पन्न असंतोष का परिणाम था और न यहाँ कला व्यवस्था से पीडित थे वरन अमेरिकी उपनिवेशों ने अपनी स्वच्छन्दता व्यवहार तथा अपनी स्वायत्तता को बनाये रखने के लिए विद्रोह किया। ये तो अमेरिकामा पा का परिणाम थी । सप्तवर्षीय था इग्लैण्ड को अपने अमेरिकी पश्चात् इंग्लैण्ड द्वारा अपनाई गई हि को जन्म दिया। यह संघर्ष रन यहाँ के लोग सामन्ती वच्छन्दता, व्यवहार में स्वतन्त्रता यूतो


अमेरिका का स्वतन्त्रता  संग्राम


अमेरिका का स्वतन्त्रता  संग्राम 4 जुलाई, 1776 को आरम्म हुआ, किन्तु जैसा कि संयुक्त राज्य अ राष्ट्रपति जॉन एडम्स का कहना है, "क्रांति का आरम्भ युद्ध के पूर्व हा हा तो लोगों के मस्तिष्क एवं हृदय में वर्तमान थी।" अर्थात् क्रांति की पृष्ठ ही तैयार हो चुकी थी। यह स्मरणीय है कि उपनिदेशवासियों में पयाप्त उनमें से बहुत को, इंग्लैण्ड से कोई विशेष शिकायत भी न थी फिर भा उन्हें एकरा के सूत्र में कैसे आबद्ध कर दिया? वे शक्तिशाली इग्लन एकजुट हो गये और अन्त में उन्हें इस्लैण्ड के निरकेश शासन से किस प्रकार इन प्रश्नों के उत्तर हमें खोजने होंगे
कि संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वितीय म युद्ध के पूर्व ही हो चुका था। क्रांति पतमान थी।" अर्थात क्रांति की पष्ठभमि काफी पर म पर्याप्त भिन्नता थी और । फिर भी परिस्थितियों ने कशाली इंग्लैण्ड के विरुद्ध कैस किस प्रकार मुक्ति मिली?

(1) इंग्लैण्ड सरकार का नगण्य हस्तक्षेप


अमेरिकी स्वतन्त्रता का सबसे प्रमुख कारण यह था कि इंग्लैण्ड ने प्रारम्भ से ही इन उपनिवेशों के स्वशासन पर अंकुश लगाने या हस्तक्षेप करने का प्रयत्न नहीं किया । अपने निर्माण काल से ही उपनिवेश परिस्थितियों के अनुसार अपना विकास करने में स्वतंत्र थे। इंग्लैण्ड की सरकार ने जार्जिया के अतिरिक्त और किसी उपनिवेश को स्थापित करने में कोई प्रत्यक्ष भाग नहीं लिया लेकिन सरकार द्वारा विभिन्न करों के लगाये जाने के पश्चात् जब उपनिवेश की स्वच्छन्दता में बाधा उपस्थित हुई, तब असंतोष पनपा और यही असंतोष क्रान्ति में बदल गया । प्रारम्भ में इंग्लैण्ड की सरकार द्वारा कोई हस्तक्षेप न किए जाने के कई कारण थे:

(i) सत्रहवीं सदी में (1688 ई. तक) लगभग 85 वर्षों तक राजतन्त्र और संसद में संघर्ष होता रहा । दोनों संस्थाओं के समर्थकों के बीच गृह-युद्ध की स्थिति बनी रही। अतः इतने लम्बे समय तक इंग्लैण्ड के राजनीतिज्ञों को इन उपनिवेशों के विषय में विचार करने के लिए समय नहीं मिला और अठारहवीं सदी के प्रारम्भ में ये उपनिवेश इतने विकसित हो गये थे कि उन पर कोई अंकुश लगाना सम्भव न था।


इंग्लैण्ड की आर्थिक व्यवस्था


(ii) अठारहवीं सदी के मध्य तक इंग्लैण्ड की आर्थिक व्यवस्था का आधार व्यापार ही था । व्यापारिक कम्पनियों को व्यापार के व्यापक अधिकार और सुविधायें प्रदान की गई थीं। इस समय उपनिवेशों का महत्व केवल इतना था कि उनसे कच्चा माल जैसे तम्बाकू, चीनी, लकड़ी, चावल, मछली आदि प्राप्त होता था । अतः उपनिवेशों के जीवन या उनके प्रशासन में इंग्लैण्ड की कोई रुचि नहीं थी।

(iii) इस समय त्रिकोणात्मक व्यापार था । डच तथा पुर्तगाली व्यापारी अफ्रीका से दास पकड़कर इन उपनिवेशों में बेचते थे और वहाँ से महुआ तथा शराब प्राप्त करते थे। उपनिवेशों में इन दासा के श्रम से उत्पन्न कच्चा माल इंग्लैण्ड जाता था जहाँ से चाय, वस्त्र और अन्य सामान अमेरिकी उपनिवेशों को भेजा जाता था । इंग्लैण्ड में ऐसे कानून अवश्य बनाये हुये थे जिनसे अंग्रेजी जहाजों में ही सामान लाया और ले जाया जाए, ये

कानून, 'नेवीगेशन ऐक्ट' कहलाते थे। किन्तु इन कानूनों का कभी सख्ती से पालन नहीं किया गया । प्रशान्त महासागर के विस्तार को देखते हुए यह सम्भव भी नहीं था और अमारकी भी इस दृष्टि से अपने को अंग्रेजों के विशेष अधीन नहीं समझते थे।

(2) उपनिवेशों में इंग्लैण्ड के प्रति प्रेम का अभाव


अमेरिका के उपनिवेशों में बसने वाले अधिकांश लोगों में इंग्लैण्ड के प्रति कोई विशेष प्रेम न था, इसके कारण थे

(1) कई लोग धार्मिक अत्याचारों से परेशान होकर उपनिवेशों में आ कर बसे थे। २० इग्लण्ड के चर्च और वहाँ की सरकार से कोई विशेष सहानुगति न थी।
(i) अंग्रेजों के अतिरिक्त अन्य यूरोपीय देशों के काफी लोग भी उपनिवेशों में आ कर बस गये थे। उन लोगों से इंग्लैण्ड के लिए किसी हमदर्दी की आशा नहीं की जा सकती थी।

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