Wednesday, September 18, 2019

गवर्नरों की मान-हानि अधिकारों के प्रयोग पर बंधन

गवर्नरों की मान-हानि अधिकारों के प्रयोग पर बंधन


ऐसी स्थिति में न काम था। विधायक 200 का विरोध करना बहुत कठिन काम था। कार्यकारिणी समिति तो सम्राट के अन्तर्गत थी, परन्तर अधिकार आप्रवासियों द्वारा चुने हुए विधायक-सदन के गवर्नरों के लिए जनता के प्रतिनिधियों का विरोध करना सदनों की यह इच्छा कि कार्यकारिणी पर उनका नियन्त्रण स्था ही थी। इस अधिकार को प्राप्त करने के उद्देश्य से ही विधायक बाण स्थापित हो जाए, स्वाभाविक भी विधायक सदन अक्सर गवर्नरी तेथे। यह रवैया अंग्रेज सरकार सदनों की यह कार को प्राप्त भाग अस्वीकृत कर की मान-हानि होती थी वरन उनके और जजों के वेतन की धनराशि की माँग अस्वीकृत कर देते थे। यह को बुरा लगता था क्योंकि इससे न केवल गवर्नरों की मान-हानि अधिकारों के प्रयोग पर बंधन भी लग जाता था। इस प्रकार सा जाता था। इस प्रकार शासक और शासित की दोनों ही एक दूसरे से असंतुष्ट थे और उनके बीच तनाव व्याप्त था।

(6) सप्तवर्षीय युद्ध का प्रभाव


उपनिवेशों के लिए जो संघर्ष हुआ उसकी अन्तिम कड़ी विश्वव्यापी सप्तमी (1756-63 ई.) युद्ध था जो कि मध्य यूरोपीय देशों के अतिरिक्त इंग्लैण्ड और फ्रांस बीच यूरोप, अमेरिका और भारत में लड़ा गया था। इस युद्ध के व्यापक प्रमाव पड़े। इस युद्ध के दौरान अमरीकियों ने अंग्रेजी सेना को विशेष सहायता नहीं दी। इतना ही नहीं कई बार तो अंग्रेज सेना के लिए आई रसद इत्यादि को लूटकर उसे चोरी-छुपे फ्रांस की सेना को बेचा। इसके अतिरिक्त वे फ्रांस से व्यापार करते रहे। युद्ध-काल में उपनिवेशियों को बहुत लाभ हुए। कुछ उद्योग धन्धों के विकास के लिए अवसर मिला | न्यूयार्क के एक गवर्नर ने भविष्यवाणी की थी कि “यदि एक बार अमेरिकी अपनी जरूरत का कपड़ा इत्यादि स्वयं उपलब्ध करने में सफल हो गये तो वे अमेरिका में इंग्लैण्ड का पा को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगे।" किसानों को अधिक मूल्य पर पैदावार मजदूरी को पर्याप्त मजदूरी पाने का मौका मिला। किन्त यद का अन्त होते हाय युद्धकालीन लामों से वंचित हो गये और अपने संकट को दूर करने का उपाय सप्तवर्षीय युद्ध के बाद इंग्लैण्ड ने कनाडा पर कब्जा कर लिया आर उत्तर से फ्रांसीसी खतरा खत्म हो गया।


इंग्लैण्ड ने कनाडा पर कब्जा


इस प्रकार जो एकमात्र था वह भी हट गया। यह स्मरणीय है कि अमेरिकी उपनिवेशवासियों का का अन्त होते ही ये लोग करने का उपाय सोचने लगे लिया और अमेरिका में मात्र अंकुश अमरीकियों पर वासियों को कनाडा में रहने वाले फ्रांसीसियों से हमेशा आक्रमण का भय बना रहता था लिए इंग्लैण्ड पर आश्रित रहना पड़ता था। अब इंग्लैण्ड के साथ बंधे रहने में कोई लाभ नहीं है। अर के रूप में एकदम परिवर्तन आ गया और उन्होंने इल मत रहना पड़ता था। अब अंग्रेज बस्तियों ने अनुन बना रहता था और इन्हें अपनी सुरक्षा और उन्होंने इंग्लैण्ड की शक्ति की अव 'कर दी। इस युद्ध का परिणाम यह भी हुआ कि उपनिवेशा क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों के साथ बड़ी योग्यता स भाग लेकर उन्होंने यह सीख लिया था कि किस प्रका एक सह-उद्देश्य के लिए युद्ध किया जा सकता है। । न अनुभव किया कि प युद्ध के बाद बस्तियों केकी अवहेलना शुरु उपनिवेशों को अपनी शक्ति का अनुम याग्यता से काम किया था। इस
॥ कि किस प्रकार सेनायें और साधन का अनुभव हुआ था। इस संघर्ष में साधन संगठित करके सप्तवर्षीय युद्ध के बाद इंग्लैण्ड ने मिसिसिपी नदी से लेकर अलगानी पर्वतमाला के व्यापक क्षेत्र को अपने नियन्त्रण में ले लिया था।

अमेरिकी बस्तियों के निवासी


अपनी सीमायें पश्चिम की ओर बढ़ाना चाहते थे और इस क्षेत्र में रहने वाले मूल निवासियों को खदेड़ देना चाहते थे। यही कारण था कि सारी पश्चिमी सीमा पर 1763-64 में मल निवासियों ने विद्रोह कर दिया और बड़े पैमाने पर रक्तपात हुआ। उत्तरी अमेरिका के रेड-इण्डियनों को शुरू से ही अंग्रेजों से घृणा थी। वे फ्रांसीसियों को अधिक पसन्द करते थे। दूसरी ओर उपनिवेशी इस विशाल विजित क्षेत्र में अपनी तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ स्वयं लाभ उठाने पर आतुर थे । इस प्रकार यहाँ इंग्लैण्ड की सरकार का उपनिवेशों के स्वार्थ से संघर्ष हो गया । नयी भूमि की आवश्यकता के कारण विभिन्न उपनिवेशों ने दावा किया कि पश्चिम में मिसिसिपी नदी तक अपनी सीमा बढ़ाने का उन्हें अधिकार है। इंग्लैण्ड की सरकार की मान्यता थी कि रेड-इण्डियनों को शान्त होने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए अन्यथा युद्धों का सिलसिला प्रारम्भ हो सकता था। इसलिए 1763 ई. में एक शाही घोषणा द्वारा ऐलेगनीज, फ्लोरिडा, मिसिसिपी और क्वेबेक के बीच का समूचा क्षेत्र रेड-इण्डियनों के लिए सुरक्षित कर दिया गया । इससे उपनिवेशवासियों का पश्चिम की ओर प्रसार रुक गया और वे इंग्लैण्ड की सरकार को अपना शत्रु समझने लगे।

(7) उपनिवेशों का आर्थिक शोषण


इंग्लैण्ड उपनिवेशों का अधिक से अधिक आर्थिक शोषण करना चाहता था परन्तु उपनिवेशी उसे सहन करने को तैयार नहीं थे। वे चाहते थे कि हम स्वयं अपने व्यवसायों तथा उद्योगों का प्रसार करें । इंग्लैण्ड को लाभ पहुंचाने में उनकी रुचि नहीं थी। दूसरी तरफ इंग्लैण्ड की सरकार यह चाहती थी कि उपनिवेश उनके धन एवं सत्ता की वृद्धि में सहयोग देते रहें। ब्रिटिश सरकार ने उपनिवेशों से व्यापार सम्बन्धी ऐसे कानून पास किए जिनसे इंग्लैण्ड को लाभ पहुँचता था । इन कानूनों को तीन समूहों में विभक्त किया जा सकता है: __(


1) नौ-संचालन कानून-


इंग्लैण्ड ने ऐसे नौ-संचालन कानून पारित किये जिनके बारा 1651 में यह व्यवस्था की गई कि उपनिवेशों में व्यापार-कार्य केवल इंग्लैण्ड, आयरलण्ड, तथा स्वयं उपनिवेशों के जहाजों के माध्यम से ही हो सकता था। इस नियम "लण्ड के पोत-निर्माण उद्योग का ही विकास हुआ ।

नौ-संचालन कानून के अन्तर्गत यवस्था की गई कि सभी प्रकार के कच्चे माल को, जिसकी इंग्लैण्ड को आवश्यकता बिना इग्लेण्ड के बन्दरगाहों पर लाये उपनिवेशों से दूसरे स्थानों पर निर्यात्त नहीं जा सकता था। इससे इंगलैण्ड के वाणिज्यवादी हितों को लाभ पहुंधा अर्थात् १ व्यापारियों को दलाली का लाभ हुआ और इंग्लैण्ड की गृह सरकार को दुबारा उद्देश्य से 1663 ई. में एक गये माल पर राजस्व की प्राप्ति हुई। इंग्लैण्ड ने अपने व्यापारवादी हितों के 1663 ई. में एक अन्य नौ-परिवहन कानून के द्वारा यह व्यवस्था की कि यूरोप हले इंग्लैण्ड के बन्दरगाहों तथा व्यापारी बेड़ों के मालिक स्पष्ट है कि ये कान यह वस्तुएँ थीं-चादर से अमेरिकी उपनिवेशों में निर्यात किया जाने वाला मा लाया जायेगा। इस कानून से भी इंग्लैण्ड के व्यापारियों तथा या
अमेरिकी उपभोक्ताओं की कीमत पर लाभ होता था। स्पष्ट उपनिवेशवासियों के लिए अन्यायपूर्ण थे।

व्यापारिक अधिनियम-


इन नियमों के अनुसार अमेरिकी उपनिवेशों के कर वस्तओं का निर्यात केवल इंग्लैण्ड को ही किया जाना था।

No comments:

Post a Comment

Aunty, bhabhi New watsapp group links 2020

Hello friends aaj aapke liye world ke sabhi contry ke whatsapp group link lekar aaye hai ye group सभी contry ke member दिखाई...