उपनिवेशों में इंग्लैण्ड के प्रति प्रेम का अभाव

(2) उपनिवेशों में इंग्लैण्ड के प्रति प्रेम का अभाव

अमेरिका के उपनिवेशों में बसने वाले अधिकांश लोगों में इंग्लैण्ड के प्रति कोई विशेष प्रेम न था, इसके कारण थे
(1) कई लोग धार्मिक अत्याचारों से परेशान होकर उपनिवेशों में आ कर बसे थे। २० इग्लण्ड के चर्च और वहाँ की सरकार से कोई विशेष सहानुगति न थी।
(i) अंग्रेजों के अतिरिक्त अन्य यूरोपीय देशों के काफी लोग भी उपनिवेशों में आ कर बस गये थे। उन लोगों से इंग्लैण्ड के लिए किसी हमदर्दी की आशा नहीं की जा सकती
थी। जाता था। जेल के अधिकारिक को दण्ड भोगने के बजाय में इंग्लैण्ड के लिए प्रेम की भीथे।

उपनिवेशों के अधिकांश

(1) अपराधी लोगों को इन मस्तियों में भेज दिया जाता था तथा जजों को प्रोत्साहित किया जाता था कि अपराधियों को अमेरिका जाकर उसने का अवसर दे। ऐसे लोगों को सतानों से मार आशा नहीं की जा सकती थी।
(iv) अंग्रेजो और अमेरिका के लोगों में धार्मिक मतभेद भी थे। उपनि निवासी प्यास्टिन थे जबकि इंग्लैण्ड के लोग इग्लेण्ड के चर्च के अन मिकता के कारण भी इंग्लैण्ड के प्रति प्रेम न रह गया था।

1) उपनिवेशों में समानता की भावना अधिक प्रबल थी जबकि इंग्लैण्ड वर्ग भेद ना हा था और समाज में कुलीन वर्ग के लोगों की प्रधानता थी। दलि देवेलियन ने ठीक ही लिखा है, “जहाँ अंग्रेजी समाज पुराना था और उसमें पेची और कृत्रिमता आ चुकी थी. वहाँ अमेरिकन लोग अभी नये-नये और सरल थे। अपनी सारी पूर्व धारणाओं और रीति-रिवाजों को त्याग कर एक नया जीवन अपनाया था और अब अमेरिकी बन गये थे।” इंग्लैण्ड के प्रति लगाव नहीं होने में इस चारित्रिक निकता का भी योगदान था। (

छ) बौद्धिक चेतना का विकास

अमेरिकी उपनिवेशों में जीवन के स्थायित्व के साथ बौद्धिक चेतना का भी विकास हुआ। बौद्धिक चेतना के विकास में शिक्षा, पत्रकारिता एवं विचारकों ने विशेष योगदान दिया । शिक्षा के क्षेत्र में इन उपनिवेशों में सबसे अग्रणी उपनिवेश था. पेनसिलवेनिया, जहाँ क्वेकर समुदाय के द्वारा बच्चों की शिक्षण संस्थाएँ चर्च की देखरेख में स्थापित का गई। 1636 में मेसाचूसेट्स के कैम्ब्रिज नगर में हारवर्ड कॉलेज की स्थापना का । 1693 में वर्जीनिया में विलियम एण्ड मेरी कॉलेज शिक्षा का प्रसिद्ध केन्द्र बन गया था। इन कॉलेजों में तथा अन्य बहुत-सी निजी शिक्षण संस्थाओं में न केवल गणित, भाषा वैज्ञानिक विषयों की शिक्षा दी जाती थी बल्कि कामगार लोगों के लिए रात्रि कमान लाओं की शिक्षा की विशेष व्यवस्था भी व्यवस्था की गई थी। स्त्रियों के लिए ललित कलाओं की शिक्षा की विशेष थी। कुछ लोगों के व्यक्तिगत प्रयासों ने भी शिक्षा की उन्नति के लिए काम उदाहरणार्थ, बैंजामिन फ्रेंकलिन ने एक विचार केन्द्र की स्थापना की जो बाद फिलोसोफिकल सोसायटी के नाम से विख्यात हआ। यद्यपि इस समय अधिकांश पुस्तकें लन्दन और यूरोप के अन्य नगरों से मंगाई जाती थाप सदी के अन्तिम वर्षों में अमेरिका के कैमिज नगर में पहला णपाखाना गया और 1704 ई. में बोस्टन से पहला समाचार पत्र प्रकाशित हुआ, जिसका बोस्टन न्यूज लेटर । यह पत्र बहुत ही निर्भीक था और स्वतंत्रता के प्रारम्भ
उन्नति के लिए कार्य किया।

बोस्टन से पहला समाचार पत्र प्रकाशित

र केन्द्र की स्थापना की जो बाद में अमेरिकन होता रहा। 1719 ई. में ‘अमेरिकन मर्करी, तथा 1725 ई. में ‘न्यूयार्क ” हुआ। 1765 ई. तक लगभग 25 समाचार पत्र प्रकाशित होने लग उपनिवेशों की स्थापना के बाद एक सौ वर्षों में ही शिक्षा और पत्रकारिता के प्रति नया दृष्टिकोण तथा राष्ट्रीयता की भावना का जन्म हो गया। धाप इस समय अमेरिका में ॥ई जाती थी परन्तु सत्राची पाखाना स्थापित किया हा, जिसका नाममा बिता के प्रारम्भ तक प्रकाशित २६. में ‘न्यूयार्क गजट प्रकाशित होने लगे थे। अमेरिका में पत्रकारिता के द्वारा जीवन 199 टॉमस पेन ने अपनी पुस्तक ‘कॉमनसेंस’ के माध्यम से अपने देशवासियों के दिलों देश-प्रेम की चेतना जागृत की । उसने इसमें स्पष्ट किया कि अब अमेरिकावासियों को लण्ड से अपने अधिकारों की रक्षार्थ सम्बन्ध विच्छेद कर लेना चाहिए । बौद्धिक चेतना के विकास में जेम्स ओटिस, पेट्रिक हेनरी तथा सेम्युल एडम्स” का भी काफी योगदान था। जेम्स ओटिस ने खोज-वारण्ट अधिनियम का विरोध किया तो पेट्रिक हेनरी ने स्टाम्प अधिनियम का । सेम्युल एडम्स ब्रिटिश सरकार को उसकी ज्यादतियों का अच्छा सबक सिखाना चाहता था। उसने क्रांति की भावना को प्रबल बनाया ।

(4) उपनिवेशियों का स्वातन्त्र्य प्रेम

आप्रवासी इंग्लैण्ड के नागरिकों की अपेक्षा अधिक स्वातन्त्र्य प्रेमी थे। इनमें जनतंत्र शासन पद्धति और स्वतन्त्रता का इंग्लैण्ड के लोगों से अधिक प्रचार था । इसकी स्पष्ट झलक वर्जीनिया के प्रथम अधिकार पत्र (1618 ई.) में देखने को मिलती है जिसमें जोर देकर कहा गया-“बसने वालों को सभी स्वाधीनताएँ, मताधिकार एवं रियायतें प्राप्त होंगी, ठीक उसी तरह जैसी वे इंग्लैण्ड में जन्म लेने पर प्राप्त करते ।” यह एक अत्यन्त ही महत्वपूर्ण बुनियादी सिद्धान्त था। मेरीलैण्ड तथा पेनसिलवेनिया के अधिकार पत्रों में यह प्रावधान था कि वे वहाँ के लिए कानूनों की रचना जन-सहमति से करें। नये महाद्वीप पर पैर रखने के साथ ही आप्रवासी अंग्रेज कानून और संविधान के अनुसार कार्य करने लगे थे-‘उनकी विधानसभा थी, प्रतिनिधिक शासन पद्धति थी और सामान्य कानून द्वारा आश्वासित व्यक्तिगत अधिकारों की मान्यता थी, इस प्रकार अमेरिकी उपनिवेशों में प्रारम्भ से ही स्वशासन की व्यवस्था विद्यमान थी, जो समय के साथ-साथ विकसित होती गई। प्रारम्भ में इंग्लैण्ड के राजा ने उनकी शासन पद्धति को मान्यता दे दी थी |

मेरीलैण्ड तथा पेनसिलवेनिया के अधिकार पत्रों

जनता के चुने हुए प्रतिनिधि कार्यपालिका के कार्यों, विशेषकर वित्तीय मामलों में इतने प्रभावशाली हो गए थे कि ऐसे भी उदाहरण मिलते हैं जबकि उन्होंने गवर्नर की तनख्वाह बन्द कर लम्बे समय तक स्वशासन के कारण अमेरिकी उपनिवेशों में एक स्वच्छन्द वातावरण का निर्माण हो चुका था। इसलिए सप्तवर्षीय युद्ध के पश्चात् अंग्रेजी सरकार ने जब अमरिकी उपनिवेशों पर कर लगाने और व्यापार को अनुशासित करने का प्रयत्न किया ता उपनिदेशों को यह कार्य अपनी स्वतन्त्रता और अधिकारों के हनन का प्रयत्न प्रतीत हुआ। वास्तव में डेढ़ शताब्दी में ही अमेरिका में स्वतन्त्रता की भावना पूर्ण परिपक्व हो अथा। 1776 में आरम्भ होने वाला स्वतन्त्रता संग्राम कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। अमरिकी राष्ट्रपति जेफरसन के शब्दों में “अमेरिकी क्रांति का वास्तविक आरम्म 1620 ठा चुका था जब वर्जीनिया को अपने प्रतिनिधि निर्वाचित करने का अधिकार दिया गया था ।

(5) दोषपूर्ण शासन व्यवस्था कार्यकारिणी समिति (3) विधायक पानवशों की शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग थे-

(1)गवर्नर

(2) गवर्नर की समिति

(3) विधायक सदन अथवा असेम्बली । गवर्नर और उसकी नर्माण और कर लगाने को में था ।

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