साराटोगा में अग्रेजों की हार

साराटोगा में अग्रेजों की हार

या क्योंकि हॉलैण्ड सुदूर-पूर्व लिया। परन्तु अक्टूबर, 1777 में दूसरे प्रमुख अंग्रेज जनरल बूंगाईन को साराटा स्थान पर जॉर्ज वाशिंगटन ने घेर लिया और उसे हथियार डालने पड़े | इस पर युद्ध की दिशा ही बदल डाली।” साराटोगा में अग्रेजों की हार का एक महत्वपूण यह हुआ कि फ्रांस, स्पेन आदि यूरोपीय देशों को अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करने के प्रोत्साहित कर दिया। यह ज्ञातव्य है कि 1776 ई.से ही फ्रांस इस युद्ध म. था और सप्तवर्षीय युद्ध का इंग्लैण्ड से बदला लेने पर उतारू था। 6 फरव अमेरिकी बस्तियों व फ्रांस में समझौता हो गया कि

(1) कोई भी अलग सेल शांति-बात नहीं करेगा,

(ii) जब तक अमेरिकी बस्तियाँ पूर्ण रूप से स्व जाती. युद्ध जारी रखा जायेगा। इस समझौते को काने में मुख्य भूमिका में की रही। 178 में फ्रांस युद्ध में कूद पड़ा। 17798 में स्पेन खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी क्योंकि वह भी जिब्राल्टर वापस छीनना हलिण्ड ने 17801 में हलण्ड के खिलाफ युद्ध घोषित कर दिया क्योकि अभिया एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया में अपने पाँच जमाने के लिए इंग्लैण्ड को अंध महासागर * फैसाए रखना चाहता था । रूस, डेनमार्क व स्वीडन ने भी हथियार बंद तटस्थता” की घोषणा कर दी और यह भी इंगलैण्ड के विरुद्ध ही थी।

फ्रांस व स्पेन की नी-सेनाओं के युद्ध

फ्रांस व स्पेन की नी-सेनाओं के युद्ध में उतरते ही युद्ध का नक्शा बदल गया । हालाँकि अंग्रेज एडमिरल रोडनी ने अमेरिकी समुद्रों में और सर जॉर्ज इलियट ने जिमाल्टर में इस दौरान अंग्रेजी माल की काफी रक्षा की। लेकिन अमेरिकी और फ्रांसीसी सेनायें अब अंग्रेजी सेना से इतनी श्रेष्ठ हो चुकी थीं कि अंततः अंग्रेजी सेनाध्यक्ष लार्ड कार्नवालिस (जो बाद में भारत का गवर्नर जनरल बना) को 19 अक्टूबर, 1781 में यार्कटाउन में हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना पड़ा। किन्तु नौ-सैनिक युद्ध चलता रहा । फ्रांस और स्पेन इंग्लैण्ड के विरुद्ध लड़ते रहे। अन्त में 1783 ई. में पेरिस की संधि से अमेरिकी स्वतन्त्रता संग्राम की समाप्ति हुई।

पेरिस की संधि (3 सितम्बर, 1783)

इंग्लैण्ड ने 13 अमेरिकी बस्तियों की स्वतन्त्रता को मान्यता प्रदान कर दी। इस नये राष्ट्र (संयुक्त राष्ट्र अमेरिका) को अलगानी पहाड़ों और मिसिसिपी नदी के बीच के अंग्रेजी क्षेत्र भी सौंप दिए गए।
(ii) फ्रांस को इंग्लैण्ड से वेस्टइंडीज में सेंट लूसिया, टोबागो; अफ्रीका में सेनीगाल व गौरी, तथा भारत में कुछ क्षेत्र प्राप्त हुए।
(iii) स्पेन को फ्लोरिडा तथा भू-मध्य-सागर में माइनारका का टापू मिला।

(iv) इंग्लैण्ड व हॉलैण्ड में युद्ध पूर्व स्थिति वापस लाई गई।
(v) नये अमेरिकी राष्ट्र की सीमा ओहायो नदी के साथ-साथ तय की गई।

अमेरिका का संविधान

इस प्रकार अमेरिका स्वतन्त्र हुआ। पेरिस संधि के द्वारा युद्ध समाप्त होते ही अमेरिकी राज्यों में आपसी मतभेद उमरने लगे परन्तु कुछ समय बाद मतभेदों को सुलझा लिया गया। नया संविधान 1789 ई. में लागू हुआ। अमेरिका में गणतन्त्र की स्थापना की गई तथा संघ पद्धति स्वीकार की गई जिसके अन्तर्गत शक्तियों का विभाजन संघीय और राज्य सरकारों के बीच किया गया | नये संविधान में अमेरिका के नागरिकों को अनेक अधिकार दिए गए जिनमें प्रमय अधिकार थे-भाषण, प्रकाशन (प्रेस) और धर्म की स्वतन्त्रता, कानून
अनुसार न्याय प्राप्त करने का अधिकार |

नये संविधान में किसी भी व्यक्ति का कानूनी प्रक्रिया के अतिरिक्त जीवन, सम्पति और स्वतन्त्रता से वंचित न रखे जाने की गारण्टी गया । संविधान के अनुसार मार्च, 1789 में नयी सरकार का गठन हुआ जिसका प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन को बनाया गया । अंग्रेजों की असफलता के कारण प्रजा की पराजय एक आश्चर्यजनक तथ्य था क्योंकि सप्तवर्षीय युद्ध के बाद अजय माना जाता था और उसकी तुलना में अमेरिकी पक्ष काफी कमजोर था। ही। इंग्लैण्ड विशाल साम्राज्य के जल सेना थी, आधुनिक अस्त्र-शस्त्र, प्रशिक्षित उपनिदेशियों की स्थिति अंग्रेजों की तुलना में तुच्छ थी। इंग्लैण्ड स्वामी था, उसके पास एक अजेय जल सेना थी, आधनिक एव अनुभवी सेनानायक थे। लगभग सभी सामरिक स्थानों पर इसके विपरीत जॉर्ज वाशिंगटन की सेना बहुत छोटी थी। किसी वाशिंगटन युद्ध भूमि पर चार हजार हथियारबन्द सिपाहियों से अधिक था। अमरीकियों के पास हथियार तथा गोला बारूद की कमी मी भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनके पास पहनने को वस्त्र आदि भी नहीं थी क स्थानों पर अंग्रेज छावनियाँ हैं।

आधुनिक अस्त्र-शस्त्र, प्रशिक्षित उपनिदेशियों की स्थिति

दी थी। किसी भी समय पर जाई सिपाहियों से अधिक नहीं जुट माया मट की कमी भी थी, और दिक , सैनिकों के पैरों में जूते तक नहीं थे। लेकिन इसके बावजूद इंग्लैण्ड को पराजय सामना करना पड़ा और अमेरिका को विजयश्री प्राप्त हुई। इंग्लैण्ड की युद्ध नीति तय करने वालों ने अमेरिकी शक्ति का ठीक अनुमान नहुँ लगाया । उन्हें अपनी शक्ति पर ज्यादा ही भरोसा था। जनरल गेज ने लन्दन गई एक रिपोर्ट में कहा भी था कि अमेरिकी उपनिदेशों को जीतने के लिए कदम शार रेजीमेंट पर्याप्त होगी।

इंग्लैण्ड के व्यापारी

कुछ व्हिग नेताओं जैसे विलियम पिट, एडमण्ड बर्क चार्ल्स फॉक्स अदि की सहानुभूति अमरीकियों के साथ थी। इसके अलावा अंग्रेज सेना के कई सिपाही अमेरिकी पक्ष को सही मानते थे। अतः उन्होंने भी युद्ध में उस भावना से काम नहीं लिया जो के आमतौर पर सैनिक दुश्मन के प्रति रखते हैं। इंग्लैण्ड के व्यापारी भी अमेरिका युद्ध किये जाने के पक्ष में नहीं थे। इंग्लैण्ड से अमेरिका तीन हजार मील की दरी पर स्थित है। यातायात का के अभाद ने इस दूरी को और अधिक बढाया जिससे सैनिक सहायता पहुंचान था। स्थिति और अधिक कठिन उस समय हो गई जब फ्रांत इस्त आन अतलांतिक महासागर पर अंग्रेजी रस द पूर्ति रेखा को भंग कर दिया था स्थानाय सहयोग के अनाव में काफी बडी कठिनाई में पड़ गई । इतना नफले हुए थे। उपनिवेशवाली के दौरान उन्हें किसी पर भी अंग्रेजी सेना स्थानीय सहयोग के अभाव में काफाब अलावा, युद्ध के केन्द्र भी लगभग एक हजार मील के घेरे में फैले हुए। अपनी घरती की भौगोलिक स्थिति से पूर्ण परिचित थे, इसाल विशेष कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा जबकि अंग्रेज विदर जॉर्ज की अलोकप्रियता एवं अधिकारियों को विजय सरल कर दी। देश का प्रभावशाली द शक्तिशाली शासक का स्वप्न धीरे-धीरे साकार हो रहा था परन्तु इसे साकार अनुनदी नेता सरकार से अलग होते जा रहे थे। जाज गम्भीरता और दूसरों की योग्यता परखने की शक्ति नहीं था जयाक अंग्रेज विदेश में लड़ रहे थे। भारयों को अयोग्यता ने उपनिदेशवासियों के हा लोग ला शासक बनने का जो स साकार करने के प्रयास में लगभग जिॉर्ज तृतीय में स्थिति की द द्वितीय की भौति नाम मात्र का शासक नहा  र निरंकुशता से शासन करना चाहता था। सत करना चाहता था। जॉर्ज का प्रधानमन्त्री लाई ना लार्ड नॉर्थ इस युद्ध में मन्त्रिमण्डल को साथ नहा शक्ति नहीं थी।

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