स्वयंसेवकों की टुकड़ी ने लेक्सिगटन गाँव के पास ब्रिटिश सेना का मार्ग रोकने का विफल प्रयास

स्वयंसेवकों की टुकड़ी ने लेक्सिगटन गाँव के पास ब्रिटिश सेना का मार्ग रोकने का विफल प्रयास

उसकी सहायता के लिए इकट्ठे हुए और उसे आवश्यक के नागरिकों ने सभी उपनिवेशों के प्रतिनिधियों का फिलाडेल्फिया में एक का सुझाव रखा जिसे अन्य उपनिवेशों ने स्वीकार कर लिया। 5 सितम्बर, 1774 को महाद्वीप की इस प्रथम कांग्रेस का आधवर जार्जिया को छोड़कर सभी उपनिवेशों की विधान सभाआन ने मेसाचूसेट्स के जॉन एडम्स तथा सेम्युल एडम्स, वजानि पैट्रिक हेनरी, दक्षिणी केरोलाइना के जॉन रूटलेज तथा क्रिस्टोफर के स्टीफन हापकिन्स, पेनसिलवेनिया के जॉन डिकिंसन आदि प्र सम्मेलन का उद्देश्य पूर्ण स्वराज्य की माँग नहीं वरन् आन्तार कार प्राप्त करना था। अधिवेशन के निर्णयानुसार एक धा का अधिवेशन शुरू हुआ जिसमें विधान सभाओं ने प्रतिनिधि भेजे । प्रतिनिाम एडम्स, वर्जीनिया के जॉर्ज वाशिंगटन तथा । क्रिस्टोफर गेडस्टेन, रोडआइलैण्ड सन आदि प्रमुख थे।

पूर्ण स्वेच्छा सार एक घोषणा-पत्र

आन्तरिक मामलों में पूर्ण स्वेच्छा सार एक घोषणा-पत्र तैयार करके इंग्लैण्ड भेजा गया। यह एक प्रकार से अधिकार आ 1765 ई. के बाद के सभी कानूनों को रहकरने की प्रार्थना का कार से अधिकारों और शिकायतों की घोषणा का घोषणा थी, जिसमें पना की गई। साथ ही धमकी के 2009 रूप में अंग्रेजी सामान के बहिष्कार का निर्णय भी लिया गया । कांग्रेस का महत्त्वपूर्ण कार्य महाद्वीपीय संस्था का गठन था, जिसने व्यापार-बहिष्कार को पुनर्जीवित किया । गाँव और में सुरक्षा समितियाँ स्थापित करने तथा बिटिश माल का उपयोग करने वालों की मचना कांग्रेस को मिजवाने का निश्चय किया गया। 22 अक्टूबर, 1774 को यह सम्मेलन इस निर्णय के साश समाप्त हो गया कि समस्याओं पर आगे भी विचार-विमर्श हेतु सम्मेलन बुलाया जायेगा। कांग्रेस का दूसरा सम्मेलन होने के पूर्व ही सरकार और नागरिकों के बीच युद्ध आरम्भ हो गया ।

एक क्रान्तिकारी शासन का संगठन

मेसाचूसेट्स में परिस्थिति गम्भीर होती जा रही थी। सेम्युल एडम्बा और अन्य ओजस्वी नेता जनता को इंग्लैण्ड के खिलाफ भड़का रहे थे। राजकीय गवर्नर जनरल गेज की बात अब कोई भी नहीं सुनता था। इसी बीच, एक क्रान्तिकारी शासन का संगठन हो गया और सैनिक भी इकट्ठे होने लगे। जब गेज ने यह सुना कि विद्रोही बोस्टन से 18 मील दूर कानकार्ड नाम के ग्राम में सैनिक सामान जुटा रहे हैं, तो उसने इस सामान को हस्तगत करने हेतु एक टुकड़ी को भेजा । स्वयंसेवकों की टुकड़ी ने लेक्सिगटन गाँव के पास ब्रिटिश सेना का मार्ग रोकने का विफल प्रयास किया। इस प्रयास में आठ स्वयंसेवक मारे गये । इसकी सूचना तत्काल सभी उपनिवेशों में फैल गई। कानकार्ड से वापस लौटती अंग्रेज सेना को हजारों स्वयंसेवकों से टक्कर लेनी पड़ी और उसके बहुत से सैनिक मारे गये। 19 अप्रेल की इस घटना से स्वतन्त्रता संग्राम का प्रारम्भ माना जा सकता है। ___

कानकार्ड और लेक्सिगटन के रक्त रंजित युद्ध का समापन

10 मई, 1775 को जबकि अभी कानकार्ड और लेक्सिगटन के रक्त रंजित युद्ध का समापन भी नहीं हुआ था, फिलाडेल्फिया में द्वितीय महाद्वीपीय सम्मेलन (कांग्रेस) हुआ। बोस्टन के एक धनी व्यापारी जॉन हैनकाक ने कांग्रेस की अध्यक्षता की। सम्मेलन में टामस जैफरसन, बेंजामिन फ्रैंकलिन जैसे महान् नेता उपस्थित थे। इस कांग्रेस में जॉर्ज वाशिंगटन का चयन अमेरिकी सेनाध्यक्ष के रूप में किया गया। कांग्रेस में ब्रितानी शोषण कविरुद्ध हथियार उठाने के कारणों पर प्रकाश डाला गया । सम्मेलन में स्पष्ट कर दिया गया कि गुलामी के जीवन से स्वतन्त्रता के लिए प्राण दे देना अधिक श्रेष्ठ है। यह निश्चय किया गया कि शस्त्रों का प्रयोग स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किया जायेगा। उपनिवेशवासी अब भी केवल ब्रिटिश संसद को ही अपना शत्रु मानते थे। लकिन 23 अगस्त, 1776 को जॉर्ज तृतीय ने एक घोषणा जारी करके अमेरिकी पावशा को विद्रोही घोषित कर दिया। इस प्रकार खुले संघर्ष का सूत्रपात हो गया। स्वतन्त्रता की घोषणा जार्ज तृतीय ने उपनिदेर्शों के विद्रोह को सैनिक शक्ति से दबा देने का निश्चय किया।

अमन सनिक किराये पर मँगाकर अपनी सैनिक शक्ति को बढ़ाया। अमरीकियों ने पाशगटन के नेतृत्व में युद्ध लड़ा। जून, 1776 तक अंग्रेजी सेनाओं का पलड़ा से अमेरिकी नेताओं के समझ में आ गया कि विदेशी सहायता आवश्यक কাৰী বন্ধ। সব যা 210 लिण्ड से अपना सम्बन्ध विच्छेद प्रतिनिधियों ने 4 जुलाई, 1776 है और यह तब तक सम्भव नहीं जब तक अमेरिका इंग्लैण्ड से अपना नहीं कर लेता । इसी कारण फिलाडेल्फिया में एकत्र प्रतिनिधियों ने को 13 बस्तियों की इंग्लैण्ड से स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी और स्वर घोषणा-पत्र का अनुमोदन कर दिया। स्वतन्त्रता के घोषणा-पत्र का मुख्य उद्देश्य यह प्रदर्शित करना था कि जान सरकार मनुष्य को उसके नैसर्गिक अधिकारों से वंचित करे तो जनता को ऐसी सरकार को बदलने का अधिकार प्राप्त हो जाता है । घोषणा-पत्र में बल पूर्वक यह घोषित किया गया कि “ईश्वर ने सब मनुष्यों को समान बनाया है।

सरकार बनाने का पूर्ण अधिकार

ईश्वर ने उन्हें कुछ ऐसे अधिकार दिये हैं, जिन्हें उनसे कोई छीन नहीं सकता। इन अधिकारों में जीवन, स्वतन्त्रता और सुख के लिए प्रयत्न शामिल हैं। इस घोषणा में इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया गया कि सत्ता का स्त्रोत जनता है और दृढ़तापूर्वक यह कहा गया कि जनता को अपनी सरकार बनाने का पूर्ण अधिकार है । घोषणा-पत्र में यह भी कहा गया कि ब्रिटेन की सरकार ने अमेरिका के उपनिवेशों पर अत्याचार किये हैं। घोषणा-पत्र में कहा गया, “अतएव हम, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि समस्त उपनिवेशों के नागरिकों के नाम से विश्व के सर्वोच्च न्यायाधीश को यह निवेदन करते हैं कि अब हम स्वतन्त्र राज्य के निवासी है। इसके साथ ही वे इस समय ब्रिटिश सम्राट के प्रति समस्त निष्ठा से मुक्त हो चुके है तथा उनके व ब्रिटेन के मध्य अब किसी प्रकार का राजनैतिक सम्बन्ध शेष नहीं है। अतः युद्ध, शान्ति, संधि, व्यापार एवं अन्य सभी मामलों में अधिकारिक रूप से निर्णय लन का स्वतन्त्र है, जो एक स्वतन्त्र राज्य के अधिकार होते हैं।”

मुख्य घटनायें-

अंग्रेज जनरल विलियम हो’ ने पहली सैनिक सफलता तब की जबकि उसने फिलाडेल्फिया कांग्रेस के सेनापति जॉर्ज वाशिंगटन को 171०३. बकरहिल की लड़ाई में पराजित किया। हो ने जल्दी ही फिलाडेल्फिया पर आधकार ल बूगाईन को साराटोगा नामक लन पड़े। इस पराजय ने का एक महत्वपूर्ण परिणाम के विरुद्ध युद्ध करने के लिए स इस युद्ध में रुचि ले रहा उतारू था। 6 फरवरी, 1778 को मा अलग से इंग्लैण्ड के साथ या पूर्ण रूप से स्वतन्त्र नहीं हो दान में मुख्य भूमिका बेंजामिन फ्रैंकलिन म स्पेन ने भी इंग्लैण्ड के वापस छीनना चाहता था। या क्योंकि हॉलैण्ड सुदूर-पूर्व लिया। परन्तु अक्टूबर, 1777 में दूसरे प्रमुख अंग्रेज जनरल बूंगाईन को साराटा स्थान पर जॉर्ज वाशिंगटन ने घेर लिया और उसे हथियार डालने पड़े |

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